Tuesday, November 10, 2020

कक्षा - सातवीं पाठ - 14

कक्षा - सातवीं

पाठ - 14
पंडित लेखराम

प्रश्न 1 - स्वामी दयानंद के दर्शनों का लेखराम पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर 1 - स्वामी दयानंद के संपर्क में से पंडित जी के जीवन में उथल-पुथल मच गई। उनकी वैदिक धर्म में आस्था दृढ़ हो गई और वे सच्चे वैदिक धर्म तथा प्रचारक बन गए।
प्रश्न 2 - अपने वेदांती मित्र दामोदरदास को 'सब कुछ ब्रह्म है' इस तर्क का लेखराम ने कैसे उतर दिया?
उत्तर 2 - एक दिन आप अपने पुराने मित्र संत दामोदरदास वेदांती के पास गए। संत जी ने कहा, "सब कुछ ब्रह्म ही ब्रह्म है।" लेखराम ने पूछा, "महाराज आप भी ब्रह्म है, मैं भी ब्रह्म हूँँ और यह पुस्तक भी ब्रह्म है? संत ने कहा, "हाँँ।" पंडित जी ने तुरंत पुस्तक उठाई और चल दिए। संत जी द्वारा मांगने पर भी उन्होंने वह पुस्तक वापस नहीं की। कहा दिया कि ब्रह्म का ब्रह्म से ब्रह्म को मांगना कैसा?

कक्षा - चौथी पाठ - 14

कक्षा - चौथी

पाठ - 14
प्रार्थना

प्रश्न 1 - प्रार्थना भगवान का ध्यान किस और करने को कहा गया है?
उत्तर 1 - प्रार्थना में भगवान का ध्यान बालकों की ओर करने को कहा गया है?
प्रश्न 2 - 'हमारा ज्ञान कल्याणकारी हो।' इसका क्या अभिप्राय है?
उत्तर 2 - किस का अभिप्राय है हमारा ज्ञान सबका भला करने वाला हो।
प्रश्न 3 - हमको सदा किसका अभिमान होना चाहिए?
उत्तर 3 - हमको सदा हमारे देश भारत का अभिमान होना चाहिए।
प्रश्न 4 - 'देश सेवा का अरमान' का क्या भाव है?
उत्तर 4 - इसका भाव है कि हम सदा देश की सेवा करते रहें।
प्रश्न 5 - देश के लिए नौजवानों की मांग होने पर बालकों की परमात्मा से क्या प्रार्थना है?
उत्तर 5 - नौजवानों की मांग होने पर देश के लिए बलिदान देने की प्रार्थना की गई है।
खालीस्थान भरे -
1 हम ब्रहमचारी वीर व्रत धारी _______ बने। {सदाचारी}
2 हमें हमारे ________ देश का अभिमान होना चाहिए। {भारत}
3 दिल में हमारे देश सेवा का ________ हो। {अरमान}

कक्षा - छठी पाठ - 14

कक्षा - छठी

पाठ - 14
जीवनदायिनी दयानंद


प्रश्न 1 - महर्षि ने पंखड़ खंडिनी में पताका कहां फरहाई?
उत्तर 1 - महर्षि ने हरिद्वार के कुंभ मेले में सप्त सरोवर में पाखंड खंडनी पताका फहराया।
प्रश्न 2 - पान में विष देने वाले के साथ स्वामी दयानंद ने कैसा व्यवहार करने को कहा?
उत्तर 2 - पान में विष देने वाले को स्वामी जी ने कहा कि वे संसार को कैद करने नहीं बंद  वरन् कैद से छुड़ाने आए हैं।
प्रश्न 3 - कर्णसिंह स्वामीजी पर तलवार का प्रहार क्यों किया?
उत्तर 3 - कर्णसिंह ने स्वामी जी द्वारा मूर्ति पूजा के खंडन से कुपित होकर स्वामी जी पर तलवार का प्रहार किया।
प्रश्न 4 - सत्यार्थ प्रकाश का प्रकाशन कब हुआ और इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर 4 - सत्यार्थ प्रकाश का प्रकाशन 1875 में हुआ। इसने पूरे देश में क्रांति पैदा कर दी।
प्रश्न 5 - पंजाब में स्वामी दयानंद सबसे पहले कहां पहुंचे?
उत्तर 5 - पंजाब में स्वामी दयानंद सबसे पहले लाहौर में पहुंचे।
प्रश्न 6 - सरदार विक्रम सिंह को ब्रह्मचर्य का महत्व किस प्रकार समझाई?
उत्तर 6 - स्वामी जी ने विक्रम सिंह को बिना बताए पीछे से बग्घी को पकड़ लिया कई चाबुक लगाने पर भी जब घोड़े आगे नहीं बढ़ पाए।
प्रश्न 7 - गौरक्षा तथा आर्य भाषा की प्रतिष्ठा को के लिए स्वामी जी ने क्या किया?
उत्तर 7 - स्वामी जी ने गौरक्षा के लिए गोरक्षण के लिए आंदोलन चलाया तथा 'गोकरुणानिधि' पुस्तक लिखी। आर्य भाषा की प्रतिष्ठा के लिए हिंदी भाषा को अपनाने और राज्य कार्य की भाषा बनाने के लिए राजकार्य किए।
प्रश्न 8 - स्वामी जी का देहावसान कब हुआ?
उत्तर 8 - स्वामी जी का देहावसान 30 अक्टूबर 1883 दीपावली वाले दिन हुआ।
प्रश्न 9 - स्वामी दयानंद लिखित तीन ग्रंथों का नाम लिखो।
उत्तर 9 - सत्यार्थ प्रकाश, संस्कार विधि, वेद भाष्य, ऋग्वेदादिभाष्य भूमिका।

Monday, November 2, 2020

कक्षा - आठवीं पाठ - 13

कक्षा - आठवीं

पाठ - 13
आश्रम व्यवस्था


प्रश्न 1 - आश्रम व्यवस्था क्यों आवश्यक है?
उत्तर 1 - हमारा समाज मनुष्य से मिलकर बना है। अगर हम समाज को उन्नति एवं सुव्यवस्थित देखना चाहते हैं तो इसे बनाने वाले मनुष्यों का जीवन भी उन्नत एवं सुव्यवस्थित होना चाहिए। इसी उद्देश्य से प्रेरित होकर प्राचीन काल में ऋषि, मुनियों ने मनुष्य जीवन को चार बराबर भागों में बांटा था। इन चारों भागों को आश्रम कहा जाता था तथा इस व्यवस्था को आश्रम व्यवस्था।
प्रश्न 2 - चारों आश्रमों के नाम लिखकर उनकी आयु सीमा भी बताएं।
उत्तर 2 - चारो आश्रम निम्नलिखित है -
1 ब्रह्मचर्य आश्रम - जन्म से पच्चीस (25) वर्ष तक।
2 गृहस्थ आश्रम - पच्चीस (25) से पच्चास (50) वर्ष तक।
3 वानप्रस्थ आश्रम - पच्चास (50) से पचहत्तर (75) वर्ष तक।
4  संयास आश्रम - पचहत्तर (75) से मृत्युपर्यन्त तक। 
प्रश्न 3 - ब्रह्मचर्य आश्रम क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर 3 - ब्रह्मचर्य आश्रम जीवन रूपी भवन की नींव के समान है। इस काल में विद्यार्थी जो भी सीखता है, वह जीवन भर उसके काम आता है। इसीलिए यह आश्रम बहुत ही महत्वपूर्ण है। जन्म से पच्चीस (25) वर्ष तक की आयु को ब्रह्मचर्य की अवस्था माना जाता है। यह आश्रम अर्थात् जीवन का यह समय ज्ञान-प्राप्ति और जीवन की तैयारी के लिए है। बचपन में मनुष्य के प्रथम गुरु उसके माता-पिता हैं। बच्चा अपने माता-पिता से कई तरह का ज्ञान प्राप्त करता है। आठ-दस वर्ष की आयु में बच्चे की शिक्षा के लिए गुरुकुल भेजा जाता था। बच्चे युवावस्था तक गुरु के पास रहकर विद्याध्ययन करते थे। 
प्रश्न 4 - गृहस्थाश्रम को सबसे ऊँँचा और श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?
उत्तर 4 - गृहस्थाश्रम को सभी आश्रमों से ऊंचा और श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि बाकी तीनों आश्रमों के मनुष्यों के लिए भोजन, वस्त्र तथा अन्य आवश्यकताओं की व्यवस्था गृहस्थी ही करते हैं। गृहस्थी अपनी संतान का पालन पोषण तो करते ही हैं, वे देश, धर्म और समाज की सेवा भी करते हैं। देश की रक्षा सब वस्तुओं का उत्पादन, वितरण आदि न्याय और शासन-व्यवस्था समाज के सुख समृद्धि की व्यवस्था सब गृहस्थी ही करते हैं।
प्रश्न 5 - एक वानप्रस्थी के क्या कर्तव्य है?
उत्तर 5 - वानप्रस्थियों को धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करते रहना चाहिए तथा विद्या-धन को दूसरों में बैठना चाहिए अर्थात् विद्यार्थियों को पढ़ाना चाहिए, यज्ञ आदि करके प्रभु की उपासना करनी चाहिए तथा योगाभ्यास करना चाहिए।
प्रश्न 6 - संन्यास आश्रम का क्या महत्व है?
उत्तर 6 - संन्यास आश्रम बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इस आश्रम की सहायता के बिना विद्या और धर्म की वृद्धि कभी नहीं हो सकती। सत्य का उपदेश करना तथा वेदादी सत्यशास्त्रों का विचार और प्रचार करना ही एक संन्यासी का परम कर्तव्य है।

कक्षा - सातवीं पाठ - 13

कक्षा - सातवीं

पाठ - 13
स्वामी दर्शनानंद

प्रश्न 1 - स्वामी दर्शनानंद का बचपन का नाम क्या था?
उत्तर 1 - स्वामी दयानंद के बचपन का नाम कृपाराम था।
प्रश्न 2 - स्वामी दयानंद के व्याख्यानों का कृपाराम पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर 2 - स्वामी दयानंद के व्याख्यानों से प्रभावित होकर कृपाराम हरिद्वार आदि स्थानों पर घूम-घूम कर वैदिक धर्म का प्रचार करने लगे। स्वामी दयानंद के संपर्क में आने से पहले वे अद्वैत वेदांती थे, किंतु अब ईश्वर, जीव और प्रकृति तीनों को मानने लगे थे।
प्रश्न 3 - महर्षि दयानंद का निर्माण होने पर इन्होंने ऋषि-ऋण चुकाने के लिए क्या किया?
उत्तर 3 - महर्षि दयानंद के निर्माण हुआ तो इन्होंने ऋषि-ऋण चुकाने के लिए स्वामी जी द्वारा रचित कुछ ग्रंथों की सैकड़ों प्रतियां पाठकों में बांट दी।
प्रश्न 4 - मुसलमानों और ईसाइयों आदि से शास्त्रार्थ करने की उन्हें बड़ी धुन थी, इसका पता कैसे चलता है?
उत्तर 4 - धार्मिक विषयों पर शास्त्रार्थ करने की इन्हें इतनी धुन थी कि अंतिम दिनों में रुग्णशैया पर पड़े हुए भी ये वहां अपनी चारपाई ले जाने का आग्रह करते थे और विपक्षियों को परास्त करते थे। अपनी मृत्यु से छह  घंटे पहले तक इन्होंने शास्त्रार्थ किए। मरते समय इन्होंने ज्वालादत्त पादरी को संदेश भिजा कि, "तुम्हें वैदिक धर्म पर यदि कोई शंका है तो समाधान कर लो। दर्शनानंद जा रहा है फिर ना कहना।"
प्रश्न 5 - स्वामी दर्शनानन्द का साहित्य किस नाम से प्रकाशित हुआ?
उत्तर 5 - स्वामी दर्शनानन्द का साहित्य 'दर्शनानंद ग्रंथ संग्रह' नाम से प्रकाशित हुआ।

कक्षा - छठी पाठ - 13

कक्षा - छठी

पाठ - 13
प्रभु का धन्यवाद

प्रश्न 1 - गंधर्व मुनिजन किसका ध्यान करते हैं?
उत्तर 1 - गंधर्व मुनिजन प्रभु का ध्यान करते हैं।
प्रश्न 2 - मुनिवर कहां रहकर प्रभु का धन्यवाद करते हैं?
उत्तर 2 - मुनिवर मंदिरों में, कन्दरों में, पर्वतों की शिखरों पर जाकर प्रभु का धन्यवाद करते हैं।
प्रश्न 3 - जलचरों के रहने का मुख्य स्थान कौन-कौन से हैं?
उत्तर 3 - जलचरों के रहने का मुख्य स्थान कूप, तालाब, सागर आदि में है।
प्रश्न 4 - हमें कैसे अवसरों पर प्रभु का धन्यवाद देते हुए ऐसे गीतों को गाना चाहिए?
उत्तर 4 - हमें शादी, कीर्तन, यज्ञ और उत्सव आदि अवसरों पर प्रभु का धन्यवाद करते हुए ऐसे गीतों को गाना चाहिए।

कक्षा - पाचवीं पाठ - 13

कक्षा - पांचवीं

पाठ - 13
सेवा

प्रश्न 1 - मन को जल्दी शुद्ध करने का साधन क्या है?
उत्तर 1 -सेवा।
प्रश्न 2 - संसार का उपकार कैसे किया जा सकता है?
उत्तर 2 - संसार का उपकार तीन प्रकार से किया जा सकता है - शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक।
प्रश्न 3 - छोटी-छोटी सेवाओं में किन्हीं दो सेवाओं का स्वरूप बताएं।
उत्तर 3 - i) मोहल्ले के बच्चों को इकट्ठा करके पढ़ाना।
ii) मंदिर में गुरुद्वारे में जूतों को सही ढंग से रखना।
iii) रस्ते में पड़े छिलके पत्थर आदि को वहां से हटाना।
प्रश्न 4 - देश में आर्य समाज के बढ़ने का क्या कारण था।
उत्तर 4 - आर्य समाज ने सेवा के कार्यों को अपनाया। जहां कहीं कोई कष्ट होता वहां आर्य समाज के कार्यकर्ता पहुंच जाते थे। इससे देश में आर्य समाज बनने लगा।

रिक्त स्थानों की पूर्ति करें - 
1 सेवा से मानसिक ________ बढ़ता है।  [बल]
2 मानसिक ________ पूरी होती है।  [साधना]
3 प्रत्येक को अपनी ________ में संतुष्ट नहीं रहना चाहिए।  [उन्नति]
4  सेवा ही ईश्वर ________ है।  [भजन]
5 सेवा से अभिमान _______ है। [मिटाता]